ज़र्रे-ज़र्रे में, दर्रे-दर्रे में है फूलों का असर,
जाती भी नहीं जहाँ सैलानियों की नज़र।
जिनकी हम तो अमूमन लेते ही हैं ख़बर,
आँखों के रास्ते मन में बसाते हैं अक़्सर।
.. बस यूँ ही ... 🙂
हाल ही में चिलचिलाती आतप जनित गर्मी में निजी कारणों से गोरखपुर जाकर और गोरखपुर से देहरादून भाया लखनऊ वापसी में बस एक दिन, वो भी सुबह से शाम ...
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