हाल ही में चिलचिलाती आतप जनित गर्मी में निजी कारणों से गोरखपुर जाकर और गोरखपुर से देहरादून भाया लखनऊ वापसी में बस एक दिन, वो भी सुबह से शाम तक ही जो कुछ भी लखनऊ में देख पाया, वही सब साझा करने के पहले गोरखपुर के प्रसिद्ध गोरखनाथ मन्दिर और कुशीनगर, जो इतिहास और वर्तमान अवशेषों के आधार पर बुद्ध के महानिर्वाण स्थल की पुष्टि करता है, को झाँक लेते है एक बार .. बस यूँ ही ...
मन्दिर परिसर में बने अपने निवास स्थल में उस शाम योगी जी भी विराजमान थे और सार्वजनिक तौर पर बाहर आने वाले भी थे, पर उनको प्रत्यक्ष देख सकूँ, उसी रात देहरादून से लखनऊ तक के रेल का समय इसकी अनुमति नहीं प्रदान कर रहा था। ख़ैर ! .. कुछ अपरिचितों की मुख मुद्रा और भाव भंगिमा भी उनकी बिना अनुमति के अपनी 'गैलरी' की थाती बना लिया .. बस यूँ ही ...
अब बढ़ते हैं कुशीनगर की ओर और चिरनिंद्रा में सोए बुद्ध की पाषाण प्रतिमा के संग-संग परिसर भी निहारते हैं .. बस यूँ ही ...
अब तक तो आप भी थक गये होंगे, हम तो थक गये भाई .. अब लखनऊ में बड़ा इमामबाड़ा , भूल-भुलैया, बौली, छोटा इमामबाड़ा, शाही हमाम, पिक्चर गैलरी, घण्टा घर, घण्टा घर तालाब इत्यादि को देखते हैं .. 'गैलरी' की थाती से निकाल-निकाल कर, जहाँ-जहाँ की 'फोटोग्राफी' की अनुमति थी .. पर देखते हैं .. "मुस्कुराइए कि आप ... भाग - २." में .. बस यूँ ही ...




















































